बांग्लादेश में चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज — राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग पर टकराव गहरा, खालिदा जिया वेंटीलेटर पर

ढाका।
बांग्लादेश में आगामी चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल उथल-पुथल से भरा हुआ है। राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दल बीएनपी और एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट के बीच खुला मतभेद सामने आया है। यह विवाद ऐसे समय तेज हुआ है जब देश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया की तबीयत गंभीर बनी हुई है और उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया है।
Political storm intensifies in Bangladesh ahead of elections

राष्ट्रपति इस्तीफे विवाद पर दो मोर्चे: बीएनपी vs छात्र आंदोलन

बीएनपी का कड़ा विरोध

मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस से मुलाकात के बाद बीएनपी नेताओं ने साफ कहा कि राष्ट्रपति पद खाली होने से “संवैधानिक शून्य” और राष्ट्रीय संकट पैदा हो सकता है।
बीएनपी नेता नजूरुल इस्लाम खान ने कहा:

“राष्ट्रपति पद देश की सर्वोच्च संवैधानिक संस्था है। इसे खाली करना खतरनाक स्थिति पैदा करेगा।”

“तानाशाही समर्थकों द्वारा संकट पैदा करने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक दल मिलकर विरोध करेंगे।”


बीएनपी का साफ कहना है कि मौजूदा समय में इस्तीफा देश को अस्थिर करने की कोशिश है।

छात्र आंदोलन की मांगें और दबाव

एंटी-डिस्क्रिमिनेशन स्टूडेंट मूवमेंट और जातीय नागरिक कमिटी का रुख बिल्कुल अलग है।
वे मांग कर रहे हैं:
1972 का संविधान खत्म करो
राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन को हटाओ

मूवमेंट के कन्वेनर हसनत अब्दुल्लाह ने अन्य दलों से राष्ट्रीय एकता की अपील करते हुए कहा:

“अगर कोई दल 1972 संविधान खत्म करने और राष्ट्रपति हटाने की मांग में शामिल नहीं होगा, तो हम उसका बहिष्कार करेंगे।”

“यह संविधान फासीवादी ढांचे को मजबूत करता आया है।”

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और भरोसा रखने की अपील भी की।

अंतरिम सरकार की दो-टूक: ‘मसला अब कानूनी नहीं, राजनीतिक है’

सूचना सलाहकार नहिद इस्लाम ने कहा कि राष्ट्रपति पर निर्णय कानूनी प्रक्रिया से नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति और राष्ट्रीय एकता के द्वारा लिया जाएगा।

मुख्य सलाहकार कार्यालय ने भी स्पष्ट किया है:

“राष्ट्रपति को हटाने पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।”

“किसी भी विकास की जानकारी समय पर दी जाएगी।”


सरकार ने प्रदर्शनकारियों से धरना न देने की अपील करते हुए कहा:

“सरकार को आपका संदेश मिल चुका है।”

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

दैनिक मानव ज़मीन की एक टिप्पणी में राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन ने कहा था कि शेख हसीना के इस्तीफे की “खबर तो सुनी, पर सबूत नहीं मिला।”
इस बयान के बाद:

विधि सलाहकार आसिफ नजूरुल ने राष्ट्रपति पर झूठ बोलने का आरोप लगाया

छात्र संगठनों ने तुरंत इस्तीफा मांगना शुरू किया

बांगभवन पर सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश भी हुई, लेकिन सुरक्षा बलों ने रोका

चुनाव बाद इस्तीफे के संकेत देते राष्ट्रपति

विदेशी मीडिया को दिए इंटरव्यू में राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन ने कहा:

“मैं जाना चाहता हूं... लेकिन चुनाव तक बना रहूंगा।”

उन्होंने शिकायत की कि यूनुस सरकार ने सात महीनों से उनसे मुलाकात नहीं की।

प्रेस विभाग हटाने और दूतावासों में उनकी तस्वीरें उतारने का भी जिक्र किया।

इन बयानों से संकेत मिलते हैं कि वे फरवरी चुनावों के बाद इस्तीफा दे सकते हैं।

उधर, खालिदा जिया की हालत गंभीर

देश की पूर्व प्रधानमंत्री और बीएनपी प्रमुख खालिदा जिया की सेहत लगातार बिगड़ती जा रही है।

उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया है

स्थिति पहले से ज्यादा नाजुक बताई जा रही है


यह राजनीतिक संकट और खालिदा की गंभीर हालत—दोनों मिलकर बांग्लादेश के राजनीतिक भविष्य को और अनिश्चित बना रहे हैं।
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Manoj Pundir

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