यह कदम महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि Airtel पहले RCS को लेकर संकोच करता रहा है — spam, अनचाहा मैसेज आदि की चिंता के चलते।
अब Google ने Airtel के साथ मिलकर RCS मैसेज भेजने वालों के लिए स्पैम-फिल्टरिंग (AI आधारित) सेटअप करने का वादा किया है, जिसके बाद Airtel ने इस सर्विस को अपनाया है।
RCS क्या है — और SMS से कैसे अलग?
RCS, जिसे “next-generation SMS” कहा जाता है, पारंपरिक SMS से कई मायनों में बेहतर है:
इसके जरिये उच्च-रेज़ॉल्यूशन फोटो / वीडियो / फाइलें भेजी जा सकती हैं।
Typing indicator, read receipts जैसे चार-पहचानी सुविधाएँ मिलती हैं — यानी आप देख सकेंगे कि सामने वाला लिख रहा है या उसने मैसेज पढ़ा है।
ग्रुप चैट, लोकेशन शेयरिंग, रिच मीडिया आदि समर्थित हैं — जो SMS में संभव नहीं थे।
RCS को एक “carrier-controlled” संदेश सेवा के रूप में डिज़ाइन किया गया है — मतलब यह कि आपके फोन का नेटवर्क इसे सपोर्ट करेगा, न कि सिर्फ ओटीटी ऐप।
सीधे कहें — RCS पारंपरिक SMS से कहीं ज़्यादा आधुनिक, सुविधाजनक और संवाद-अनुकूल है।
भारत में क्या-क्या बदलेगा — फायदे और संभावित चुनौतियाँ
Airtel-Google की यह साझेदारी भारत में RCS को बड़े पैमाने पर लाने पर जोर दे रही है — पहले RCS का लाभ केवल कुछ नेटवर्क या ऐप्स तक सीमित था। अब बड़े स्तर पर संभावित बदलाव संभव हैं।
SMS की सीमाओं (160 अक्षर, मीडिया न भेज पाना आदि) से मुक्ति मिलेगी।
इंटरनेट-आधारित मैसेजिंग ऐप्स पर निर्भरता कम हो सकती है — क्योंकि RCS नेटवर्क-कंट्रोल्ड है, कई सुविधाएँ मूल मैसेजिंग ऐप में उपलब्ध होंगी।
यदि सभी बड़े टेलीकॉम ऑपरेटर्स (जैसे Airtel, पहले से अन्य) RCS अपनाते हैं — तो एक unified, interoperable मैसेजिंग पारिस्थितिकी बनेगी।
चुनौतियाँ और जानने योग्य बातें
Airtel RCS मैसेज भेजने पर ₹ 0.11 प्रति मैसेज चार्ज करने का प्रस्ताव दे रहा है (80:20 revenue share model के तहत Google के साथ)।
स्पैम और गलत-उद्देश्य वाले मैसेज की आशंका — यही कारण था कि Airtel शुरुआत में RCS से दूर था। अब zwar Google से spam filters के वादे के बाद कदम बढ़ाया गया है।
यह स्पष्ट नहीं है कि RCS कब और कैसे हर यूजर के लिए उपलब्ध होगा — rollout gradual होगा।
क्यों RCS को लेकर माहौल बदल रहा है: बड़ा परिप्रेक्ष्य
RCS दरअसल 2007 में एक global standard हुआ करता था, जिसे GSMA द्वारा प्रस्तावित किया गया था — लेकिन कई सालों तक इसे भारत में बड़े पैमाने पर लागू नहीं किया गया।
अब जब बाज़ार में इंटरनेट-मैसेजिंग ऐप्स (चाहे वो ओटीटी हों या अन्य) आम हो चुके हैं, तो carrier-controlled messaging को फिर से प्रासंगिकता मिल रही है। RCS उसी दिशा की कोशिश है।
विशेषज्ञों का मानना है कि once सभी बड़े ऑपरेटर RCS अपनाएंगे, तो यह एक सामूहिक “carrier-based, unified messaging ecosystem” की नींव बन सकती है — जो SMS के बाद अगला बड़ा कदम होगा।
मैसेज करने की तस्वीर होगी बदलने वाली
Airtel और Google की इस साझेदारी से संकेत मिलते हैं कि भारत में मैसेजिंग सिर्फ इंटरनेट ऐप्स तक सीमित नहीं रहेगी — भविष्य में native, नेटवर्क-based, आधुनिक मैसेजिंग (RCS) आम हो सकती है। अगर rollout ठीक तरह से हुआ और spam/चार्जिंग के मसलों को संभाला गया — तो यह कदम SMS की जगह एक नई, बेहतर मैसेजिंग परंपरा की शुरुआत हो सकती है।
