सुप्रीम कोर्ट ने रोहिंग्या नागरिकों पर दिखाया सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने 5 लापता रोहिंग्या नागरिकों का पता लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने याचिकाकर्ता से तीखे स्वर में सवाल किया— “क्या हमें उनके लिए लाल कालीन बिछाना चाहिए?”
पीठ ने कहा कि सीमा क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील होते हैं, इसलिए ऐसे मामलों में अतिरिक्त सावधानी और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विशेष ध्यान जरूरी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को हल्के में नहीं लिया जा सकता और सरकार को ऐसे मामलों में व्यापक विवेक का अधिकार है।

याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि दिल्ली पुलिस ने मई 2025 में पांच रोहिंग्या नागरिकों को हिरासत में लिया था और “कस्टोडियल गिरफ्तारी” के बाद उनका पता नहीं चल पाया। याचिका में अदालत से आग्रह किया गया कि इनका पता लगाया जाए, हिरासत में हों तो उचित प्रक्रिया अनुसार पेश किया जाए, और यदि गिरफ्तारी अवैध पाई जाती है तो रिहाई या विधिक प्रक्रिया के तहत निर्वासन सुनिश्चित किया जाए।
Supreme Court adopts a tough stance on the plea regarding five missing Rohingya citizens, raising sharp questions on their legal status and national security.
सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने पूछा कि क्या भारत सरकार ने इन रोहिंग्या नागरिकों को कानूनी रूप से शरणार्थी घोषित किया है। अदालत ने कहा कि अवैध तरीके से देश में आए लोगों को विशेष अधिकार या सुविधाएँ देने का प्रश्न गंभीर है— “क्या हम घुसपैठियों के लिए रेड कार्पेट बिछाएँ?”
पीठ ने यह भी कहा कि भारत के लाखों नागरिक अभी भी मूल सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए अवैध रूप से आए लोगों को विशेष सहूलियत देना न्यायसंगत नहीं हो सकता। हालांकि कोर्ट ने यह ज़रूर स्पष्ट किया कि किसी भी अवैध प्रवासी के साथ थर्ड-डिग्री या अमानवीय व्यवहार नहीं किया जा सकता और उसे कानून के अनुसार पूरी प्रक्रिया मिलनी चाहिए।

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई की तारीख 16 दिसंबर 2025 तय की है और इसे रोहिंग्या नागरिकों की कानूनी स्थिति से जुड़े अन्य मामलों के साथ जोड़ा जाएगा। अगली सुनवाई में अदालत यह देखेगी कि क्या ये लोग वास्तव में पुलिस हिरासत में थे, उनकी कानूनी स्थिति क्या थी, और क्या उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।

यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा, मानवाधिकार और अवैध प्रवासियों की कानूनी स्थिति जैसे संवेदनशील विषयों से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट का आगामी निर्णय इस दिशा में महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित कर सकता है।
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Manoj Pundir

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