वॉशिंगटन।
जेफ्री एपस्टीन कांड से जुड़ी एक पीड़िता ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पीड़िता ने खुलासा किया कि उसने पहले डोनाल्ड ट्रंप को वोट दिया था, लेकिन अब एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के मामले में प्रशासन के रवैये से नाराज़ होकर वह ट्रंप का महाभियोग होते देखना चाहती है। पीड़िता का कहना है कि एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेजों की सार्वजनिकता और पारदर्शिता को लेकर सरकार का रुख निराशाजनक रहा है।
पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एपस्टीन जैसे गंभीर अपराध से जुड़े मामलों में पीड़ितों को न्याय और सच्चाई दोनों की जरूरत होती है, लेकिन दस्तावेजों के जारी होने की प्रक्रिया और कथित देरी ने भरोसे को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका गुस्सा किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी से जुड़ा है।
जेफ्री एपस्टीन कांड से जुड़ी एक पीड़िता ने अमेरिकी राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। पीड़िता ने खुलासा किया कि उसने पहले डोनाल्ड ट्रंप को वोट दिया था, लेकिन अब एपस्टीन से जुड़े दस्तावेजों के मामले में प्रशासन के रवैये से नाराज़ होकर वह ट्रंप का महाभियोग होते देखना चाहती है। पीड़िता का कहना है कि एपस्टीन केस से जुड़े दस्तावेजों की सार्वजनिकता और पारदर्शिता को लेकर सरकार का रुख निराशाजनक रहा है।
पीड़िता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एपस्टीन जैसे गंभीर अपराध से जुड़े मामलों में पीड़ितों को न्याय और सच्चाई दोनों की जरूरत होती है, लेकिन दस्तावेजों के जारी होने की प्रक्रिया और कथित देरी ने भरोसे को ठेस पहुंचाई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका गुस्सा किसी राजनीतिक दल से नहीं, बल्कि जवाबदेही और पारदर्शिता की कमी से जुड़ा है।
इस बयान के बाद अमेरिका में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं। समर्थक इसे प्रशासन पर नैतिक दबाव बढ़ाने वाला कदम बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक मुद्दा करार दे रहे हैं। एपस्टीन मामले से जुड़े दस्तावेजों और उच्च-प्रोफाइल नामों को लेकर पहले से ही अमेरिकी राजनीति में तनाव बना हुआ है।
