पश्चिम बंगाल के उत्तर जलपाईगुड़ी जिले के छोटे से गांव भातुर बाड़ी से निकलकर देश सेवा तक का सफर तय करने वाली लेडी कांस्टेबल मोनिका रॉय आज युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। साधारण ग्रामीण परिवेश में पली-बढ़ी मोनिका कभी गांव के खेतों में परिवार का हाथ बंटाया करती थीं, लेकिन उनके मन में बचपन से ही वर्दी पहनकर देश की सेवा करने का सपना था।
अपने इसी सपने को साकार करने के लिए मोनिका ने कड़ा संघर्ष किया। चयन के बाद उन्होंने आरटीसी बरवाहा में 47 सप्ताह तक चले कठिन और अनुशासित प्रशिक्षण में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने शारीरिक दक्षता, ऑपरेशनल फील्ड-क्राफ्ट और अनुशासन के हर मानक पर खुद को साबित किया। कठिन प्रशिक्षण के बाद मोनिका ने न केवल सफलता हासिल की, बल्कि अपने बैच में टॉपर बनकर उभरीं।
उनकी इस उपलब्धि से परिवार, गांव और पूरे उत्तर जलपाईगुड़ी जिले में खुशी का माहौल है। साथ ही केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को भी एक कर्तव्यनिष्ठ और सक्षम महिला जवान मिली है। मोनिका की सफलता इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इच्छाशक्ति, कठिन परिश्रम और आत्मविश्वास के बल पर कोई भी युवा अपने सपनों को साकार कर सकता है।
लेडी कांस्टेबल मोनिका रॉय की कहानी आज उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद देश सेवा का सपना देखते हैं। उनका सफर यह संदेश देता है कि गांव की पगडंडियों से भी राष्ट्रीय सेवा के ऊंचे शिखर तक पहुंचा जा सकता है।

