सहारनपुर
उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का असर अब धरातल पर व्यापक रूप से दिखने लगा है। मुख्यमंत्री के कड़े निर्देशों के अनुपालन में सहारनपुर परिक्षेत्र (सहारनपुर रेंज) के तीनों जनपदों—सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली—में पुलिस ने बाहरी व्यक्तियों की पहचान और सत्यापन (Verification) के लिए अब तक का सबसे सघन अभियान छेड़ दिया है।
इस महाअभियान की कमान खुद पुलिस उप महानिरीक्षक (DIG), सहारनपुर परिक्षेत्र, अभिषेक सिंह ने संभाल रखी है। बुधवार को उन्होंने मीडिया से मुखातिब होते हुए इस अभियान की रूपरेखा और अब तक की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी।
हर संदिग्ध पर पुलिस की नजर: कौन है राडार पर?
डीआईजी अभिषेक सिंह ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक सामान्य जांच नहीं है, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने की एक बड़ी कवायद है। पुलिस की टीमें गली-मोहल्लों से लेकर औद्योगिक क्षेत्रों तक दस्तक दे रही हैं। विशेष रूप से निम्नलिखित श्रेणियों के लोगों का डेटाबेस तैयार किया जा रहा है:
किरायेदार और घरेलू सहायक: जो लोग दूसरे जिलों या राज्यों से आकर किराये के मकानों में रह रहे हैं या घरों में काम करते हैं।
मजदूर वर्ग: फैक्ट्रियों, निर्माण स्थलों और ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले ठेकेदारों के कर्मचारी।
अस्थायी निवासी: झुग्गी-झोपड़ियों, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, रैन बसेरों और सड़क किनारे पन्नी डालकर रहने वाले लोग।
फर्जी आईडी का खेल होगा खत्म: क्रॉस-वेरिफिकेशन शुरू
डीआईजी ने अभियान की गंभीरता को समझाते हुए एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कई बार अपराधी या संदिग्ध तत्व स्थानीय पते पर फर्जी दस्तावेज बनवाकर छिप जाते हैं। इस बार पुलिस केवल आधार कार्ड देखकर संतुष्ट नहीं होगी।
डीआईजी ने कहा, "हम उन व्यक्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो स्थानीय पते के साथ पहचान पत्रों का उपयोग कर रहे हैं। उनके आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों को उनके मूल जनपदों (जहां के वे मूल निवासी हैं) भेजकर क्रॉस-वेरिफिकेशन (Cross-Verification) कराया जा रहा है। यदि किसी का दस्तावेज फर्जी पाया गया, तो उसके खिलाफ तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
रोहिंग्या और बांग्लादेशियों पर पुलिस का कड़ा पहरा
इस सत्यापन अभियान का एक प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अवैध घुसपैठियों की आशंका को देखते हुए पुलिस पूरी तरह सतर्क है। डीआईजी अभिषेक सिंह ने दो टूक शब्दों में कहा कि परिक्षेत्र में रोहिंग्या या बांग्लादेशी नागरिकों के अवैध निवास को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि कोई भी विदेशी नागरिक पहचान छिपाकर यहाँ न रह रहा हो। संदिग्ध पाए जाने वाले व्यक्तियों की गहनता से पूछताछ की जा रही है और अवैध रूप से रह रहे लोगों के विरुद्ध वैधानिक प्रक्रिया के तहत कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।
सुरक्षा के लिए निरंतर जारी रहेगा अभियान
प्रशासन ने आम जनता से भी अपील की है कि वे अपने किरायेदारों और कर्मचारियों का सत्यापन कराने में पुलिस का सहयोग करें। डीआईजी ने आश्वस्त किया है कि अपराध नियंत्रण और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह अभियान भविष्य में भी निरंतर जारी रहेगा, ताकि आम जनमानस सुरक्षित महसूस कर सके।
