भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार बल्लेबाज स्मृति मंधाना हाल ही में बेंगलुरु में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान सोशल मीडिया ट्रोलिंग का शिकार हो गईं। बेंगलुरु पैलेस में आयोजित एक वनप्लस लॉन्च इवेंट में सफेद फ्लोर-लेंथ गाउन पहनकर पहुंचीं मंधाना को उनके खेल की उपलब्धियों के बजाय उनके पहनावे और शरीर को लेकर अशोभनीय टिप्पणियों और मीम्स का सामना करना पड़ा।
हालांकि यह नकारात्मकता ज्यादा देर तक नहीं टिकी। सोशल मीडिया पर खिलाड़ियों, प्रशंसकों और खेल जगत से जुड़े लोगों ने खुलकर मंधाना का समर्थन किया और इस तरह की ट्रोलिंग को महिलाओं के प्रति दोहरे मापदंड और misogyny करार दिया। समर्थकों ने कहा कि एक शीर्ष एथलीट का शरीर वर्षों की मेहनत, ट्रेनिंग, ताकत और अनुशासन से बनता है, न कि फैशन के पैमानों से।
कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि पुरुष क्रिकेटरों को सार्वजनिक कार्यक्रमों में उनके शरीर या लुक के आधार पर क्यों नहीं आंका जाता, जबकि महिला खिलाड़ियों को बार-बार इस तरह की आलोचना झेलनी पड़ती है। प्रशंसकों ने चर्चा को मंधाना की उपलब्धियों की ओर मोड़ते हुए उनके रन, मैच जिताऊ पारियां और निरंतरता को याद दिलाया।
मैदान पर मंधाना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका असली जवाब बल्ले से आता है। श्रीलंका के खिलाफ जारी टी-20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में उन्होंने 4,000 टी-20 अंतरराष्ट्रीय रन पूरे कर लिए। ऐसा करने वाली वह पहली भारतीय महिला क्रिकेटर और दुनिया की दूसरी खिलाड़ी बनीं, उनसे पहले यह उपलब्धि केवल सूजी बेट्स ने हासिल की थी। श्रीलंका की कप्तान चामरी अट्टापट्टू के खिलाफ मंधाना की दमदार बल्लेबाजी से भारत ने सीरीज में 1-0 की बढ़त बना ली।
सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच मंधाना के समर्थकों ने साफ संदेश दिया है कि उनकी पहचान रिकॉर्ड, जज्बे और निरंतर प्रदर्शन से है, न कि क्षणिक ट्रोलिंग से।
