भारत और अफगानिस्तान के बीच पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को लेकर सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम द्विपक्षीय बैठक आयोजित की गई। यह बैठक 17 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित द्वितीय डब्ल्यूएचओ पारंपरिक चिकित्सा वैश्विक शिखर सम्मेलन के अवसर पर हुई। बैठक की सह-अध्यक्षता भारत सरकार में आयुष मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री प्रतापराव जाधव तथा अफगानिस्तान के जन स्वास्थ्य मंत्री मौलवी नूर जलाल जलाली ने की।
बैठक के दौरान आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी सहित पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा हुई। दोनों देशों ने ज्ञान के आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण और पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में शिक्षा, अनुसंधान, नियमन एवं स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए संयुक्त प्रयासों की संभावनाओं पर विचार किया।
भारतीय पक्ष ने आयुष प्रणालियों के माध्यम से समग्र और जन-केंद्रित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने के अपने अनुभव साझा किए, वहीं अफगान प्रतिनिधिमंडल ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत के योगदान और विशेषज्ञता की सराहना की। बैठक में यह भी सहमति बनी कि पारंपरिक चिकित्सा न केवल सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में भी इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस संवाद के माध्यम से भारत और अफगानिस्तान ने यह दोहराया कि पारंपरिक चिकित्सा को स्वास्थ्य कूटनीति के एक सशक्त माध्यम के रूप में आगे बढ़ाया जाएगा और भविष्य में इस दिशा में ठोस सहयोगात्मक पहल की जाएंगी।
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