लखनऊ।
उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। नियामक आयोग द्वारा बुधवार को जारी की गई नई कॉस्ट डाटा बुक में यह साफ कर दिया गया है कि उपभोक्ता प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में से किसी एक को चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अधिकार विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के अंतर्गत उपभोक्ताओं को प्राप्त है।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि विद्युत अधिनियम-2003 के अनुसार उपभोक्ता चाहें तो सुरक्षा राशि जमा कर पोस्टपेड कनेक्शन बनाए रख सकते हैं। उन्होंने कहा कि अब तक प्रदेश में इस प्रावधान का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा था, लेकिन नई कॉस्ट डाटा बुक ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।
सहमति के बिना प्रीपेड मीटर नहीं
आयोग ने यह भी साफ किया है कि किसी भी उपभोक्ता को उसकी सहमति के बिना जबरन प्रीपेड मोड में कनेक्शन देना विद्युत अधिनियम का उल्लंघन है। बिजली कंपनियां स्मार्ट मीटर जरूर लगा सकती हैं, लेकिन मीटर का मोड—प्रीपेड या पोस्टपेड—पूरी तरह उपभोक्ता की इच्छा पर निर्भर करेगा।
इस फैसले के बाद उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। वर्मा ने गुरुवार को ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर नई कॉस्ट डाटा बुक जारी किए जाने पर आभार भी व्यक्त किया।
