करोड़ों खर्च फिर भी वीरान: देवबंद का तल्हेड़ी बुजुर्ग रेलवे स्टेशन 6 साल से ट्रेनों के ठहराव को तरसा

60 से अधिक गांवों के यात्री परेशान; 2020 से पहले रुकती थीं 5 ट्रेनें, अब सिर्फ एक; स्थानीय लोगों ने रेल मंत्री से लगाई गुहार।

देवबंद विधानसभा क्षेत्र का तल्हेड़ी बुजुर्ग रेलवे स्टेशन पिछले छह वर्षों से पूरी तरह वीरान और सुनसान पड़ा है। एक समय था जब इस स्टेशन से क्षेत्र के लगभग 60 से अधिक गांवों के लोग दिल्ली, मेरठ, सहारनपुर और अन्य राज्यों के लिए रेल सफर तय करते थे। यह स्टेशन स्थानीय लोगों के लिए आवागमन की एक बेहद मजबूत कड़ी हुआ करता था।
Talheri Buzurg railway station in Deoband remains deserted for 6 years. Locals demand train stoppages as over 60 villages face commuting issues.
बदलाव का दर्द: साल 2020 से पहले यहाँ कम से कम 5 ट्रेनों का ठहराव था, लेकिन अब यहाँ महज सुबह के वक्त सिर्फ एक ट्रेन रुकती है। इसके बाद पूरे दिन स्टेशन पर सन्नाटा पसरा रहता है।
स्थानीय नेताओं पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र के छोटे-छोटे कामों का श्रेय लेकर वाहवाही बटोरने वाले जनप्रतिनिधि इस गंभीर समस्या पर पूरी तरह मौन हैं। इस वजह से यहाँ के व्यापारी, छात्र और नौकरीपेशा लोग लंबे समय से परेशान हैं और लगातार ट्रेनों के दोबारा ठहराव की मांग कर रहे हैं।
विडंबना यह है कि केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में इस रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण और विकास पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं। लेकिन करोड़ों की लागत से चमचमाती इमारत बनने के बावजूद यात्रियों को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। थक-हारकर अब स्थानीय निवासियों और यात्रियों ने सीधे रेल मंत्री से गुहार लगाई है कि पहले की तरह यहाँ ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित किया जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को फिर से सुगम यातायात की सुविधा मिल सके।
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Manoj Pundir

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