कोलकाता: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मचे भारी सियासी घमासान के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को एक और बहुत बड़ा झटका लगा है, जब उसके तीन पूर्व दिग्गज राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थाम लिया और पार्टी ने उन्हें तुरंत होने वाले आगामी उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के भीतर चल रहा आंतरिक संकट अब खुलकर सामने आ गया है। गुरुवार को टीएमसी के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों—सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने कोलकाता के साल्ट लेक स्थित भाजपा कार्यालय में औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। राज्य भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टacharya ने इन तीनों नेताओं को भाजपा का झंडा सौंपकर पार्टी में स्वागत किया। इस बड़े दलबदल के कुछ ही घंटों बाद दिल्ली में भाजपा केंद्रीय नेतृत्व ने आगामी 24 जुलाई को होने वाले राज्यसभा उपचुनाव के लिए इन तीनों नेताओं को अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया।
यह पूरी राजनीतिक हलचल पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की हार और पार्टी के भीतर उभरे तीखे मतभेदों के बाद शुरू हुई थी। इन तीनों नेताओं ने लगभग एक महीने पहले ही राज्यसभा और टीएमसी, दोनों से इस्तीफा दे दिया था। सुखेंदु शेखर राय टीएमसी के एक प्रमुख संसदीय चेहरे और मुख्य सचेतक रह चुके हैं, जबकि सुष्मिता देव असम से ताल्लुक रखती हैं और साल 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी में शामिल हुई थीं। प्रकाश चिक बड़ाइक साल 2023 में टीएमसी के टिकट पर उच्च सदन में पहुंचे थे। इन तीनों ने अपने पुराने दल के भीतर नेतृत्व के प्रति नाराजगी और कथित भ्रष्टाचार का हवाला देते हुए पाला बदला है।
इस नाटकीय घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल में राज्यसभा चुनाव के गणित को पूरी तरह से बदल दिया है। वर्तमान में 294 सदस्यीय राज्य विधानसभा में भाजपा के पास 207 विधायक हैं। वहीं दूसरी तरफ, टीएमसी के भीतर बड़ी बगावत देखी जा रही है, जहां पूर्व टीएमसी विधायक रितब्रत बनर्जी के नेतृत्व में लगभग 65 विधायकों का एक धड़ा अलग हो चुका है, जबकि ममता बनर्जी के प्रति केवल 15 विधायक ही वफादार बचे हैं। विपक्ष में इस भारी फूट और बिखराव के कारण अब भाजपा के पास तीन सीटों पर अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त आंकड़े मौजूद हैं, जिससे इन तीनों नए चेहेरों का संसद पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है।
भाजपा में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव ने कहा कि भाजपा एक राष्ट्रीय पार्टी है और वह बिना किसी टिकट की लालसा के देश और बंगाल के विकास के लिए इसमें शामिल हुई हैं। वहीं सुखेंदु शेखर राय ने ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि बंगाल में वामपंथ और टीएमसी के शासन में विकास पूरी तरह ठप हो गया था और जनता बदलाव चाहती थी। दूसरी तरफ, टीएमसी के वफादार खेमे के वरिष्ठ नेताओं ने इस दलबदल को खास तवज्जो न देते हुए कहा कि जो लोग सिर्फ अपनी सीट बचाने के लिए पार्टियां बदलते हैं, उनके जाने से टीएमसी को कोई नुकसान नहीं होगा, क्योंकि जनता ममता बनर्जी के साथ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उपचुनावों से ठीक पहले हुआ यह घटनाक्रम टीएमसी के लिए एक बहुत बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बड़ी सफलता हासिल करने के बाद अब भाजपा राज्य से राज्यसभा में भी अपनी ताकत को काफी मजबूत करने की स्थिति में आ चुकी है। आगामी 24 जुलाई को होने वाले मतदान से पहले इस दलबदल ने राज्य के सियासी समीकरणों को पूरी तरह से गरमा दिया है, और आने वाले दिनों में कुछ और बड़े नेताओं के पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई हैं।
