दूध में मिलावट पर योगी सरकार का बड़ा एक्शन, हानिकारक रसायन मिले तो डेयरी होगी बंद

लखनऊ, 16 अगस्त। उत्तर प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ योगी सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रवर्तन कार्रवाई को और कड़ा कर दिया है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने डेयरी और दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों में हानिकारक रसायन, विजातीय वसा और अन्य अपमिश्रकों के इस्तेमाल पर तत्काल कार्रवाई के लिए नए निर्देश जारी किए हैं।
Uttar Pradesh has intensified its crackdown on milk adulteration. FSDA orders immediate closure, product seizure, destruction, licence suspension, statewide brand bans and FIRs when harmful chemicals or foreign fats are found in dairy products, aiming to protect public health and eliminate organized adulteration networks.


नए आदेश के तहत यदि किसी डेयरी या दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाई में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायन अथवा विजातीय वसा पाए जाते हैं, तो कार्रवाई केवल नमूना लेकर जांच कराने तक सीमित नहीं रहेगी। संबंधित निर्माण इकाई को तत्काल बंद कराया जाएगा, वहां मौजूद दुग्ध उत्पादों को जब्त कर नियमानुसार नष्ट कराया जाएगा और गंभीर मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।

हानिकारक रसायन मिलने पर पूरी खेप होगी जब्त
FSDA के निर्देश के अनुसार, किसी डेयरी या दुग्ध उत्पाद की निर्माण अथवा प्रसंस्करण इकाई में हानिकारक रसायन, विजातीय वसा या अन्य गंभीर अपमिश्रक पाए जाने पर वहां मौजूद समस्त दुग्ध उत्पादों को जब्त किया जाएगा। जब्त उत्पादों को नियमानुसार नष्ट कराया जाएगा।
सरकार का उद्देश्य केवल एक संदिग्ध नमूने पर कार्रवाई करने के बजाय उस पूरी खेप और निर्माण प्रक्रिया को कार्रवाई के दायरे में लाना है, जहां मिलावट की आशंका या पुष्टि हुई है।

डेयरी इकाई तत्काल बंद होगी
जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 34 के तहत आकस्मिक प्रतिषेध आदेश जारी किया जाएगा। इसके बाद संबंधित इकाई में उत्पादन कार्य तत्काल प्रभाव से बंद कराया जा सकेगा।

संगठित मिलावट पर होगी FIR
यदि किसी प्रतिष्ठान में जनस्वास्थ्य के लिए हानिकारक रसायनों का संगठित रूप से इस्तेमाल पाया जाता है, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
यानी विभाग की कार्रवाई अब केवल खाद्य नमूने की रिपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मिलावट के स्रोत, निर्माण प्रक्रिया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों तक पहुंचेगी।

पूरे प्रदेश में ब्रांड की बिक्री पर प्रतिबंध
किसी ब्रांड के दुग्ध उत्पादों में हानिकारक रसायन या विजातीय वसा की पुष्टि होने पर संबंधित ब्रांड के उत्पादों की बिक्री पर पूरे उत्तर प्रदेश में प्रतिबंध लगाया जाएगा।

यदि कोई उत्पाद उत्तर प्रदेश के बाहर निर्मित हुआ है, लेकिन जांच में उसमें हानिकारक रसायन या विजातीय वसा की पुष्टि होती है, तो ऐसे ब्रांड के उत्पादों की बिक्री भी प्रदेश में प्रतिबंधित की जा सकती है।

खाद्य लाइसेंस भी होगा निलंबित
कठोर प्रवर्तन कार्रवाई के तहत संबंधित प्रतिष्ठान का खाद्य लाइसेंस अथवा पंजीकरण तत्काल निलंबित किया जाएगा। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक (खाद्य कारोबार का लाइसेंस एवं पंजीकरण) विनियम, 2011 के विनियम 2.1.8 (4) के तहत किए जाने के निर्देश दिए गए हैं।
रिफाइंड तेल और डिटर्जेंट सहित कई पदार्थों के इस्तेमाल के मामले
विभागीय निरीक्षणों के दौरान कुछ दुग्ध उत्पाद निर्माण इकाइयों में रिफाइंड तेल एवं वसा, सोयाबीन और उसके उत्पाद, टेल्कम पाउडर, डिटर्जेंट, टाइटेनियम डाइऑक्साइड, लिक्विड ग्लूकोज, सेफोलाइट, रानीपॉल, टीनोपॉल और हाइड्रोजन परॉक्साइड जैसे पदार्थों के इस्तेमाल के मामले सामने आए हैं।

इसके अलावा न्यूट्रीलाइजर, सर्फेक्टेंट, लेवलिंग एजेंट, ब्लीचिंग एजेंट, व्हाइटनिंग एजेंट और इमल्सीफाइंग एजेंट जैसे पदार्थों के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। विभाग के अनुसार कम लागत वाली गुणवत्ताहीन सामग्री और ऐसे रसायनों से तैयार दूध एवं दुग्ध उत्पाद उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
पनीर, खोवा, घी और क्रीम पर भी रहेगी नजर
सरकार की कार्रवाई केवल दूध तक सीमित नहीं है। पनीर, खोवा, घी, छेना, क्रीम सहित विभिन्न दुग्ध उत्पाद भी जांच के दायरे में रहेंगे। इन उत्पादों की मूल प्रकृति से अलग किसी अनधिकृत पदार्थ के मिश्रण को गंभीरता से लिया जाएगा।

FSDA का उद्देश्य प्रदेश में दूध और दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के साथ मिलावट के संगठित नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगाना है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार, दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट के खिलाफ इस तरह की व्यापक और कड़ी कार्रवाई करने वाला उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य बना है।
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Manoj Pundir

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