सीतापुर। यूपी पुलिस की साइबर क्राइम सेल को साइबर धोखेबाजों के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। सीतापुर पुलिस ने एक ऐसे अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो म्यूल बैंक खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी और अवैध क्रिप्टो ट्रेडिंग में लिप्त था। पुलिस ने इस गिरोह के 6 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार कर उनके पास से बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है, जिसमें एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, पासबुक और एक चार पहिया वाहन शामिल है।
कैसे करते थे साइबर ठगी?
गिरोह के सदस्य अलग-अलग शहरों में घूम-घूमकर लोगों को इन्वेस्टमेंट ट्रेडिंग में बड़ा मुनाफा कमाने का लालच देते थे। वे लोगों को भरोसे में लेकर उनके—
बैंक अकाउंट,
पासबुक,
चेकबुक,
एटीएम कार्ड,
और खातों से जुड़े मोबाइल सिम कार्ड
अपने कब्जे में ले लेते थे।
इन खातों को वे म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल करते थे। इसके बाद इन खातों के जरिए UPI और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से पैसे ट्रांसफर कर बड़े पैमाने पर मनी लॉन्ड्रिंग की जाती थी। गिरोह इन खातों का उपयोग करके अवैध क्रिप्टो ट्रेडिंग भी करता था जिससे उन्हें भारी कमीशन मिलता था।
अब तक का बड़ा खुलासा
पुलिस जांच में सामने आया कि—
गिरोह अब तक ₹11 करोड़ 95 लाख 40 हजार की साइबर ठगी कर चुका है।
45 से अधिक बैंक खाते धोखाधड़ी में इस्तेमाल किए गए।
20 CSC आईडी (जनसेवा केंद्र आईडी) भी फर्जी लेन-देन में उपयोग की गईं।
ये सभी खाते और CSC आईडी या तो धोखे से प्राप्त किए गए थे या कमीशन के लालच में लोगों ने स्वयं अपने दस्तावेज इन ठगों के हवाले कर दिए थे।
पुलिस की सख्त चेतावनी
पुलिस ने नागरिकों को सचेत करते हुए कहा कि किसी भी अनजान व्यक्ति को कभी भी अपना—
बैंक अकाउंट,
एटीएम,
पासबुक,
या मोबाइल सिम
न दें।
इस तरह किसी का म्यूल अकाउंट बनना भी साइबर अपराध में सीधी भागीदारी माना जाता है, जिसका गंभीर कानूनी परिणाम होता है।
पुलिस की सतर्क कार्रवाई
सीतापुर पुलिस की यह कार्रवाई साइबर अपराधियों के खिलाफ बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि गिरोह के नेटवर्क और अन्य संभावित साथियों की तलाश जारी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति निवेश का लालच देकर बैंक दस्तावेज मांगता है तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें।
