बदायूं। उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में भक्ति, आस्था और आध्यात्मिक भाव का ऐसा अनूठा उदाहरण देखने को मिला है, जिसने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। यहां 28 वर्षीय पिंकी शर्मा ने समाज की परंपरागत धारणाओं से अलग हटकर भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को अपना जीवनसाथी चुन लिया।
पिंकी बचपन से ही कृष्ण भक्ति में गहराई से डूबी रही है। परिवार के लोगों के अनुसार, पिंकी का भगवान श्रीकृष्ण के प्रति गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक लगाव रहा है। वर्षों से वह श्रीकृष्ण को अपने आराध्य से आगे बढ़कर अपने समर्पण का केंद्र मानती रही। अंततः उसने अपने जीवन को पूर्ण रूप से भगवान के चरणों में समर्पित करने का निर्णय लिया और विवाह का मार्ग चुना।
परिवार ने निभाई बेटी की इच्छा — पूर्ण रस्मों के साथ संपन्न हुआ विवाह
पिंकी के इस निर्णय को उसके परिवार ने न केवल स्वीकार किया, बल्कि उसकी भावना का सम्मान करते हुए पूरे पारंपरिक विधि-विधान के साथ विवाह समारोह का आयोजन किया।
विवाह मंडप सजाया गया
पंडित द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण हुआ
पारंपरिक रीति से पूजा-अर्चना की गई
और अंत में पिंकी ने भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा को गोद में लेकर सात फेरे लिए
समारोह में परिवार के सदस्य और करीबी रिश्तेदार मौजूद रहे। सभी ने पिंकी के निर्णय को उसकी व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा के रूप में स्वीकार किया।
स्थानीय लोगों में चर्चा — भक्ति का अनूठा उदाहरण
इस विवाह की खबर क्षेत्र में तेजी से फैल गई और स्थानीय लोग इसे भक्ति और आस्था का दुर्लभ रूप मान रहे हैं। कुछ लोग इसे आध्यात्मिक समर्पण बताते हैं, तो कुछ इसे सामाजिक मान्यताओं से परे एक व्यक्तिगत निर्णय मान रहे हैं।
पिंकी का कहना है कि भगवान श्रीकृष्ण उसके जीवन के मार्गदर्शक और प्रेरणा रहे हैं और इस विवाह का उद्देश्य उनके प्रति पूर्ण समर्पण और आध्यात्मिक संबंध को स्थापित करना है।
यह अनूठा विवाह न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि समर्पण और विश्वास की भावना व्यक्ति को किस हद तक अपने आराध्य से जोड़ सकती है।
