देश की सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवाओं में इलाज की गुणवत्ता को एक समान बनाने और चिकित्सकीय त्रुटियों को कम करने की दिशा में केंद्र सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। सरकार आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) के तहत लगभग 70 हजार सरकारी और निजी अस्पतालों में एआई (Artificial Intelligence) आधारित क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम तैनात करने की तैयारी में है। इस तकनीक को ‘स्मार्ट डॉक्टर’ नाम दिया गया है।
यह अत्याधुनिक प्रणाली एम्स, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है, जिसका उद्देश्य डॉक्टरों को रोगों की पहचान, जांच और उपचार से जुड़े निर्णयों में तकनीकी सहायता प्रदान करना है। ‘स्मार्ट डॉक्टर’ मरीज के लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण कर चिकित्सकों को सटीक और मानकीकृत उपचार विकल्प सुझाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, इस पहल से देशभर में इलाज की गुणवत्ता में समानता आएगी और गलत दवाइयों या उपचार से होने वाली चिकित्सा त्रुटियों में उल्लेखनीय कमी होगी। विशेष रूप से दूरदराज और संसाधन-संकट वाले क्षेत्रों में यह तकनीक डॉक्टरों के लिए एक मजबूत सहायक साबित होगी।
सरकार का मानना है कि डिजिटल हेल्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सकता है। ABDM के तहत पहले ही डिजिटल हेल्थ आईडी और इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड जैसी सुविधाएं शुरू की जा चुकी हैं, और अब ‘स्मार्ट डॉक्टर’ इस मिशन को नई गति देगा।
