भारत की आधुनिक मूर्तिकला को वैश्विक पहचान दिलाने वाले प्रख्यात शिल्पकार राम सुतार का 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से कला जगत ही नहीं, बल्कि पूरा देश एक ऐसे सृजनशील व्यक्तित्व को खो बैठा है, जिसने अपनी कृतियों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक चेतना को पत्थर और कांसे में ढाल दिया।
राम सुतार को विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के निर्माता के रूप में विशेष पहचान मिली। सरदार वल्लभभाई पटेल की यह भव्य प्रतिमा न केवल इंजीनियरिंग और कला का अद्भुत उदाहरण है, बल्कि राष्ट्रीय एकता का भी सशक्त प्रतीक बन चुकी है।
इसके अलावा उनकी प्रमुख कृतियों में बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर स्थापित 108 फीट ऊंची केम्पेगौड़ा प्रतिमा, छत्रपति शिवाजी महाराज और डॉ. भीमराव आंबेडकर की अनेक प्रसिद्ध मूर्तियां शामिल हैं। उनकी बनाई प्रतिमाएं देश के कई शहरों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को इतिहास और मूल्यों से जोड़ती रहेंगी।
सरल जीवन और समर्पित साधना के लिए पहचाने जाने वाले राम सुतार को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया। उनका निधन भारतीय कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
