ब्रिटेन की राजनीतिक पार्टी रिफॉर्म यूके द्वारा लंदन मेयर पद के लिए घोषित उम्मीदवार लैला कनिंघम अपने एक विवादित बयान के कारण सुर्खियों में आ गई हैं। कनिंघम ने सुझाव दिया कि बुर्का पहनने वाली महिलाओं पर “स्टॉप-एंड-सर्च” जांच लागू की जानी चाहिए, जिससे देश में नागरिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।
उनके इस बयान के बाद मानवाधिकार संगठनों, मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों और कई राजनेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। आलोचकों का कहना है कि ऐसा प्रस्ताव भेदभावपूर्ण है और किसी विशेष धार्मिक समुदाय को निशाना बनाता है। उनका तर्क है कि सुरक्षा के नाम पर इस तरह की नीति सामाजिक विभाजन को बढ़ावा देगी और महिलाओं की व्यक्तिगत आज़ादी पर सीधा आघात करेगी।
वहीं, कनिंघम के समर्थकों का कहना है कि उन्होंने यह सुझाव सार्वजनिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिया है और इसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। रिफॉर्म यूके पार्टी ने भी बयान का बचाव करते हुए कहा कि पार्टी हर प्रकार के उग्रवाद के खिलाफ है और सुरक्षा उपायों पर खुली चर्चा होनी चाहिए।
ब्रिटेन में आने वाले मेयर चुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद चुनावी माहौल में प्रवासन, पहचान और धार्मिक स्वतंत्रता जैसे विषयों को और गरमा सकता है।
