अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया आक्रामक विदेश नीति और बयानबाज़ी को लेकर अमेरिकी जनता में असंतोष बढ़ता दिखाई दे रहा है। ताज़ा जनमत सर्वेक्षणों में सामने आया है कि ट्रंप का ध्यान घरेलू मुद्दों से अधिक डेनमार्क जैसे सहयोगी देशों को धमकाने और पश्चिमी गोलार्ध में टकराव की भाषा इस्तेमाल करने पर केंद्रित है, जिसे अधिकतर लोग गैरज़रूरी और खतरनाक मानते हैं।
सर्वे के अनुसार बड़ी संख्या में मतदाताओं का मानना है कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय संबंधों में कूटनीति के बजाय “दबाव और धौंस” की रणनीति अपना रहे हैं। डेनमार्क को लेकर दिए गए उनके बयानों और सैन्य कार्रवाई जैसी धमकियों ने यूरोपीय देशों के साथ अमेरिका के रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की भाषा न केवल अमेरिका की वैश्विक छवि को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि नाटो जैसे गठबंधनों को भी कमजोर कर सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि ट्रंप की यह शैली घरेलू राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश है, लेकिन आम नागरिक महंगाई, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे मुद्दों को अधिक प्राथमिकता देना चाहते हैं। सर्वे में शामिल अधिकांश लोगों ने कहा कि अमेरिका को सहयोगी देशों के साथ सम्मानजनक संवाद रखना चाहिए, न कि टकराव की नीति अपनानी चाहिए।
डेमोक्रेटिक खेमे ने ट्रंप की इस रणनीति की तीखी आलोचना की है, जबकि उनके समर्थक इसे “मजबूत नेतृत्व” बता रहे हैं। आने वाले चुनावी माहौल में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में बड़ी बहस का विषय बनता दिख रहा है।
